Wednesday, November 21, 2018

एक बार फिर !!!

शून्य से जाना शिखर तक, एक बार फिर !!!
आज जुड़ना है बिखरकर, एक बार फिर !!!

फिर हथेली पर खुशी के बीज बोने-सींचने हैं
फूल उम्मीदों के, खिलते देखना है फिर !!!

डूबकर गहरे समंदर, मोतियों को ढूँढ़ना है
स्याह रातों में उजाला खोजना है फिर !!!

चाह में तारों को छूने की,जले हर बार हाथ
जिद अभी भी, एक तारा तोड़ना है फिर !!!

चाँद - तारों का तो नाता, रात से हरदम रहा
रात का ख्वाबों से रिश्ता जोड़ना है फिर !!!

रेत के घर को तो ढहना था, ढहा, अच्छा हुआ
अब समंदर के किनारे खेलना है फिर !!!

हम परिंदे भाँप लेते हैं हवा की नीयतों को
आज तूफां के इरादे, जानना है फिर !!!

गर्म लावा खदबदाता है कहीं दिल की जमीं में
आग के दरिया के रुख को मोड़ना है फिर !!!









Tuesday, November 13, 2018

तुम रहो ना, पास यूँ ही !!!

बीत जाए ज़िंदगी का,
ना कहीं मधुमास यूँ ही !!!
तुम रहो ना, पास यूँ ही ।।

बरसने दो नेह को,
आँखों के बादलों से तुम !
हूँ अभी ज़िंदा, मुझे
होता रहे आभास यूँ ही !
तुम रहो ना, पास यूँ ही।।

बँध गए अनुबंध के धागे,
तो रहने दो बँधे !
प्रीत के पाखी को उड़ने
दो खुले आकाश यूँ ही !
तुम रहो ना, पास यूँ ही।।

कह गईं बातें हजारों
एक खामोशी तेरी !
रह गए दिल में सिहरकर
कुछ मेरे जज्बात यूँ ही !
तुम रहो ना, पास यूँ ही।।

भर गया खुशबू से दामन
इक तेरी मौजूदगी से !
खूबसूरत इन लम्हों का,
दिल में हो अहसास यूँ ही !
तुम रहो ना, पास यूँ ही।।

कौन जाने इस जनम,अब
हम मिलें या ना मिलें !
तेरी यादों के सहारे,
काट लूँ वनवास यूँ ही !
तुम रहो ना, पास यूँ ही।।

Tuesday, October 30, 2018

अपना कहाँ ठिकाना है ?

मन रे, अपना कहाँ ठिकाना है ?
ना संसारी, ना बैरागी,
जल सम बहते जाना है,
बादल जैसे संग पवन के 

यहाँ वहाँ उड़ जाना है !
जोगी जैसे अलख जगाते 

नई राह मुड़ जाना है !
नहीं घरौंदा, ना ही डेरा, 
धूनी नहीं रमाना है !
मन रे, अपना कहाँ ठिकाना है ?

मोहित होकर रह निर्मोही, 

निद्रित होकर भी जागृत!
चुन असार से सार मना रे, 
विष को पीकर बन अमृत !
काहे सोचे, कौन हमारा, 
कच्चा ताना बाना है!
टूटा तार, बिखर गई वीणा, 
फिर भी तुझको गाना है!!!
मन रे, अपना कहाँ ठिकाना है ?

सपनों की इस नगरी में 
कब तक भटकेगा दर दर
स्वप्न को सत्य समझकर 
रह जाएगा यहीं उलझकर!
निकल जाल से, क्रूर काल से 
तुझको आँख मिलाना है
नाटक खत्म हुआ तो 
भ्रम का परदा भी गिर जाना है !
मन रे, अपना कहाँ ठिकाना है ?