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Friday, October 14, 2016

माफ करना वीर मेरे !


माफ करना वीर मेरे !

माफ करना वीर मेरे !
मैं तुम्हें ना दे सकी...
श्रद्धांजलि !

हर तरफ था जिक्र तेरे शौर्य का
हर जुबाँ पर थी तेरी कुर्बानियों की दास्ताँ
वीर मेरे ! रो रहे थे नैन कितने...
दिल भी सबके रो रहे थे !
देखती पढती रही मैं
वीरता की हर कहानी, जिसमें तुम थे !
नमन - वंदन क्या मैं कहती, शब्द कम थे !
वीर मेरे ! कोई उपमा ना मिली !

माफ करना वीर मेरे !
मैं तुम्हे ना दे सकी...
श्रद्धांजलि !

है मेरा भी लाल कोई
जैसे तुम थे माँ के अपनी...
बस उसी के अक्स को
तेरी जगह रखा था मैंने !
हाँ, उसी पल से...तभी से...
रुह मेरी सुन्न है और काँपते हैं हाथ मेरे !
शब्द मेरे रो पड़े और रुक गई मेरी कलम भी !
वीर मेरे ! अश्रुधारा बह चली...

माफ करना वीर मेरे !
मैं तुम्हें ना दे सकी...
श्रद्धांजलि ! श्रद्धांजलि !
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