Friday, December 9, 2016

नींव इमारत की


नींव इमारत की

आपने पौधे लगाए, और
फल हम खा रहे,
थामकर उँगली चलाया,
हम तभी तो चल रहे।।

उम्र भर औरों के ही,
वास्ते सब कुछ किया,
तन दिया, मन भी दिया
औ' सारा जीवन भी दिया
ना किए कुछ शौक पूरे,
गम भी सारे सह लिए.....
थामकर उँगली चलाया,
हम तभी तो चल रहे।।

आप हैं वह नींव जिस पर
हम इमारत हैं खड़ी,
अपने बच्चों की भलाई
आप सोचें हर घड़ी,
दर्द हो बच्चों को तो भी
आपके आँसू बहे....
थामकर उँगली चलाया,
हम तभी तो चल रहे।।

आप हैं वटवृक्ष जिसकी
छाँव भी आशीष है,
आप हैं ममता की लोरी,
ज्ञान वाली सीख हैं
सीखते हैं आपसे हम,
चाहे जितने पढ़ रहे।।
थामकर उँगली चलाया,
हम तभी तो चल रहे।।

काँपते हाथों में भी है
प्यार की ताकत अभी,
अपने अनुभव के खजाने
बाँटिए हमसे कभी,
भूल हमसे हो कभी तो
माफ भी करते रहें....
थामकर उँगली चलाया,
हम तभी तो चल रहे।।
(मेरे प्यारे मम्मी पापा को समर्पित )