Friday, January 19, 2018

वीणावादिनी


वीणावादिनी ! वरदहस्त तुम
मेरे सिर पर धर देना !
अपनी कृपा के सुमनों से माँ,
आँचल मेरा भर देना !

मैं नहीं योग्य, मैं नहीं शुद्ध,
ना निर्मल मन, ना मति प्रबुद्ध,
माँ अपनी दयावृष्टि करके
हर पातक मेरा हर लेना !
अपनी कृपा के सुमनों से माँ,

आँचल मेरा भर देना !
     
माँ, ज्ञानकोष है सागर सम
यह रिक्त कभी ना हो सकता,
जितना बाँटूँ, बढ़ता जाए
इतना ही मुझको वर देना !
अपनी कृपा के सुमनों से माँ,

आँचल मेरा भर देना !
     
तुमसे पाकर, तुमको अर्पण
करने में सकुचाता है मन,
सुन लेना बालक का क्रंदन,
बस यही अनुग्रह कर देना !
अपनी कृपा के सुमनों से माँ,

आँचल मेरा भर देना !