Sunday, January 7, 2018

सृजन - गीत

सृजन में संलग्न होकर
निर्मिती के गीत गा लो,
प्रेम-पथ पर है घना तम,
दीप निष्ठा का जला लो !
          सृजन में संलग्न होकर....

वेदना,पीड़ा,व्यथा, को
ईश का उपहार समझो,
तुम बनो शिव,आज परहित
इस हलाहल को पचा लो !
         सृजन में संलग्न होकर.....

नीर को, अब क्षीर से,
करना विलग तुम सीख भी लो,
उर-उदधि को कर विलोड़ित,
नेह के मोती निकालो !
          सृजन में संलग्न होकर.....

गहन गहरी कंदरा सा,
हृदय तल पाया है तुमने !
खोज लोगे रत्न अनगिन
मन जरा अपना खंगालो !
         सृजन में संलग्न होकर....