Saturday, March 24, 2018

तिश्नगी

तेरे अहसास में खोकर तुझे जब भी लिक्खा,
यूँ लगा,लहरों ने साहिल पे 'तिश्नगी' लिक्खा !

मेरी धड़कन ने सुनी,जब तेरी धड़कन की सदा,
तब मेरी टूटती साँसों ने 'ज़िंदगी' लिक्खा !

रात, आँखों के समंदर में घुल गया काजल
चाँद के चेहरे पे बादल ने 'तीरगी' लिक्खा !

इस मुहब्बत के हर इक दर्द का जिम्मा उसका,
जिसने पहले-पहल,ये लफ्ज 'आशिकी' लिक्खा !

हर तरफ तुझको ही ढूँढ़े है, निगाहें बेताब
एक बुत के लिए, अश्कों ने 'बंदगी' लिक्खा !
                                         - मीना शर्मा -

तिश्नगी /तश्नगी - प्यास
तीरगी - अंधेरा
बुत - मूर्ति
बंदगी - इबादत